सुलझेंगी गुत्थी रिश्तों की होंगीं राह सुगम जीवन की। सुलझेंगी गुत्थी रिश्तों की होंगीं राह सुगम जीवन की।
जो रोक ले इसे प्रारंभ में ही तो बस्ते में सिर्फ भरा हो अभिमान। जो रोक ले इसे प्रारंभ में ही तो बस्ते में सिर्फ भरा हो अभिमान।
जितना चाहत दिल से रस पिया फिर मदमस्त हो उड़ जाती जितना चाहत दिल से रस पिया फिर मदमस्त हो उड़ जाती
मधुर मिलन की आस संजोकर मिलेंगे चंद्र धरा फिर झूम के। मधुर मिलन की आस संजोकर मिलेंगे चंद्र धरा फिर झूम के।
क्षितिज पर लगता, मानो आकाश-धरा का मिलन है ऊंचाई की अनुभूति, हर्षित ये मन है। क्षितिज पर लगता, मानो आकाश-धरा का मिलन है ऊंचाई की अनुभूति, हर्षित ये मन है।
एक नए रूप के साथ बहरूपिया कलमकार। एक नए रूप के साथ बहरूपिया कलमकार।